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Sensex Today: मामूली तेजी के साथ 84,200 पर बंद, अमेरिकी टैरिफ नीति से बाजार की धड़कन तेज

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मामूली तेजी के साथ 84,200 पर बंद, अमेरिकी टैरिफ नीति से बाजार की धड़कन तेज

भारतीय शेयर बाजार में आज सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ 84,200 के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी हल्की तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों, खासतौर पर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के संभावित टैरिफ फैसलों को लेकर निवेशकों की नजरें टिकी रहीं। इसके साथ ही आज IREDA और Tejas Networks के तिमाही नतीजों ने भी बाजार का ध्यान खींचा।

यह लेख पूरी तरह SEO-friendly और यूनिक है, जिसमें हम बाजार की चाल, सेक्टोरल मूवमेंट, वैश्विक संकेत, टैरिफ का असर, और आज के प्रमुख कॉर्पोरेट नतीजों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।


आज बाजार की शुरुआत कैसी रही?

आज सुबह भारतीय बाजार ने मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच सपाट शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ खुला, लेकिन चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में खरीदारी आने से बाजार धीरे-धीरे हरे निशान में आ गया।

➡️सेंसेक्स: 84,200 के आसपास

➡️निफ्टी 50: 25,700 के करीब

➡️बैंक निफ्टी: सीमित बढ़त के साथ कारोबार

निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बचते दिखे और ज्यादातर ट्रेडिंग रेंज-बाउंड रही।


सेंसेक्स में तेजी के प्रमुख कारण

1. चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में खरीदारी

आईटी, बैंकिंग और पावर सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिसने सेंसेक्स को सपोर्ट दिया।

2. कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें सीमित दायरे में रहीं, जिससे भारतीय बाजार को राहत मिली।

3. रुपये में स्थिरता

डॉलर के मुकाबले रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा, जो विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना गया।


निफ्टी और सेक्टोरल परफॉर्मेंस

आज सेक्टर-वाइज प्रदर्शन मिला-जुला रहा:

➡️आईटी सेक्टर: अमेरिकी संकेतों के चलते हल्की मजबूती

➡️बैंकिंग सेक्टर: प्राइवेट बैंकों में सीमित खरीदारी

➡️पावर और PSU स्टॉक्स: IREDA जैसे शेयरों पर फोकस

➡️मेटल सेक्टर: कमजोर वैश्विक मांग के कारण दबाव

कुल मिलाकर, किसी एक सेक्टर में तेज रैली नहीं दिखी, बल्कि निवेशकों ने स्टॉक-स्पेसिफिक अप्रोच अपनाई।


अमेरिका में ट्रम्प के टैरिफ फैसले पर क्यों टिकी हैं नजरें?

अमेरिका में चुनावी माहौल के बीच डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा टैरिफ को लेकर दिए गए संकेतों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अगर ट्रम्प प्रशासन दोबारा सख्त टैरिफ नीति अपनाता है, तो इसका असर:

➡️ग्लोबल ट्रेड

➡️आईटी और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियां

➡️उभरते बाजारों में विदेशी निवेश

➡️पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

भारत पर संभावित असर

भारत की आईटी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में टैरिफ बढ़ने से:

➡️आईटी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव

➡️एक्सपोर्ट-आधारित सेक्टर्स में वोलैटिलिटी

➡️एफआईआई फ्लो में अस्थिरता

देखी जा सकती है।


वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों का असर

पिछले कारोबारी सत्र में वॉल स्ट्रीट में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एशियाई बाजारों में भी ज्यादातर इंडेक्स सपाट रहे।

➡️जापान का निक्केई: हल्की गिरावट

➡️हांगकांग हैंग सेंग: सीमित बढ़त

➡️शंघाई कंपोजिट: लगभग स्थिर

इन संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा, जहां निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।


आज के बड़े कॉर्पोरेट नतीजे: IREDA और Tejas Networks

IREDA के नतीजों पर बाजार की नजर

Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) हाल के महीनों में निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में सरकारी फोकस और ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग के चलते इस शेयर में अच्छी रुचि देखी गई है।

निवेशक खासतौर पर इन बातों पर ध्यान दे रहे हैं:

➡️लोन बुक की ग्रोथ

➡️एनपीए की स्थिति

➡️भविष्य की गाइडेंस

Tejas Networks के नतीजे

Tejas Networks टेलीकॉम और नेटवर्किंग सॉल्यूशंस के क्षेत्र में एक अहम कंपनी है। 5G और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च के चलते इसके नतीजों से बाजार को उम्मीदें हैं।

नतीजों में ये फैक्टर अहम होंगे:

➡️रेवेन्यू ग्रोथ

➡️ऑर्डर बुक की स्थिति

➡️सरकारी और प्राइवेट प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले ऑर्डर


PSU शेयरों में क्यों बनी हुई है दिलचस्पी?

पिछले कुछ समय से PSU शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके पीछे कारण हैं:

➡️मजबूत बैलेंस शीट

➡️सरकारी नीतियों का समर्थन

➡️डिविडेंड यील्ड

IREDA जैसे PSU स्टॉक्स इस ट्रेंड का अच्छा उदाहरण हैं।


विदेशी निवेशकों (FII) का रुख

हालिया सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सतर्क नजर आ रहे हैं। कभी-कभी बिकवाली और कभी सीमित खरीदारी देखने को मिल रही है।

इसके प्रमुख कारण:

➡️अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

➡️डॉलर की मजबूती

➡️ग्लोबल पॉलिटिकल अनिश्चितता

अगर ट्रम्प के टैरिफ फैसलों को लेकर स्पष्टता आती है, तो FII फ्लो में स्थिरता देखने को मिल सकती है।


घरेलू निवेशकों (DII) की भूमिका

डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DII) लगातार बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं। SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में आ रहा पैसा बाजार की गिरावट को सीमित कर रहा है।


टेक्निकल एनालिसिस: आगे के अहम स्तर

सेंसेक्स के लिए

➡️सपोर्ट: 83,800

➡️रेजिस्टेंस: 84,500

निफ्टी के लिए

➡️सपोर्ट: 25,600

➡️रेजिस्टेंस: 25,850

अगर बाजार इन स्तरों को decisively तोड़ता है, तो अगली दिशा साफ हो सकती है।


निवेशकों के लिए रणनीति

शॉर्ट-टर्म निवेशक

➡️रेंज-बाउंड ट्रेडिंग अपनाएं

➡️नतीजों के बाद स्टॉक्स में एंट्री करें

लॉन्ग-टर्म निवेशक

➡️मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस

➡️PSU, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर नजर


क्या अभी बाजार में जोखिम है?

हां, कुछ हद तक जोखिम बना हुआ है:

➡️ग्लोबल अनिश्चितता

➡️अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी

➡️जियो-पॉलिटिकल टेंशन

लेकिन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और DII सपोर्ट बाजार को बड़ी गिरावट से बचा सकता है।


निष्कर्ष

आज का सत्र साफ तौर पर सतर्कता और सीमित तेजी का रहा। सेंसेक्स का 84,200 के स्तर पर टिके रहना बाजार की मजबूती दिखाता है, लेकिन बड़े ट्रिगर के अभाव में निवेशक फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ फैसलों पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है, जबकि घरेलू स्तर पर IREDA और Tejas Networks जैसे शेयरों के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

आने वाले दिनों में ग्लोबल संकेत और कॉर्पोरेट नतीजे ही यह तय करेंगे कि बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा या फिर कुछ समय तक इसी दायरे में बना रहेगा।

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