Reading: The Raja Saab Review बड़ी उम्मीदें, लेकिन प्रभास की यह फिल्म रह गई अधूरी

The Raja Saab Review बड़ी उम्मीदें, लेकिन प्रभास की यह फिल्म रह गई अधूरी

johar-jharkhand.com
7 Min Read

The Raja Saab Review बड़ी उम्मीदें, लेकिन प्रभास की यह फिल्म रह गई अधूरी

जब किसी फिल्म में प्रभास जैसा सुपरस्टार हो और जॉनर हॉरर–कॉमेडी जैसा दिलचस्प हो, तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप आसमान छूने लगती हैं। ‘The Raja Saab’ से भी कुछ ऐसा ही अपेक्षित था—डर और हंसी का जबरदस्त तड़का, दमदार विजुअल्स और प्रभास का नया अवतार। लेकिन अफसोस, यह फिल्म न तो डराती है और न ही हंसाने में कामयाब होती है। नतीजा यह कि दर्शक थिएटर से निकलते वक्त खुद से यही सवाल पूछते हैं—क्या यही वो ‘राजा साब’ था, जिसका इंतजार किया जा रहा था?

Contents

कहानी (Story): आइडिया अच्छा, ट्रीटमेंट कमजोर

फिल्म की कहानी एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शाही विरासत और रहस्यमयी हवेली से जुड़ा है। हवेली में अजीब घटनाएं होती हैं, आत्माओं की मौजूदगी का अहसास कराया जाता है और बीच-बीच में कॉमेडी डालने की कोशिश की जाती है।

समस्या यह है कि कहानी में नवीनता की भारी कमी है। हॉरर–कॉमेडी के नाम पर वही पुराने घिसे-पिटे फॉर्मूले—

▶️अचानक डराने वाले सीन

▶️बैकग्राउंड म्यूजिक से डर पैदा करने की कोशिश

▶️जबरन ठूंसे गए कॉमिक ट्रैक

इन सबका असर दर्शकों पर नहीं पड़ता। कहानी पहले हाफ में ही अनुमानित हो जाती है और सेकंड हाफ तक आते-आते फिल्म बोझिल लगने लगती है।


स्क्रीनप्ले और निर्देशन: सबसे बड़ी कमजोरी

निर्देशक मारुति से उम्मीद थी कि वह हॉरर और कॉमेडी के बीच सही बैलेंस बनाएंगे, लेकिन स्क्रीनप्ले ही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरता है।

▶️डर पैदा करने वाले सीन प्रभावहीन हैं

▶️कॉमेडी पंचलाइन फ्लैट लगती हैं

▶️सीन एक-दूसरे से जुड़ते नहीं

हॉरर–कॉमेडी में टाइमिंग सबसे अहम होती है, लेकिन ‘The Raja Saab’ में यही टाइमिंग पूरी तरह मिसिंग है।


प्रभास का अभिनय: स्टारडम है, लेकिन जान नहीं

Prabhas इस फिल्म में पूरी मेहनत करते नजर आते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उनके अभिनय को बांधकर रखती है।

पॉजिटिव्स:

▶️स्क्रीन प्रेजेंस शानदार

▶️कुछ सीन्स में कॉमिक एक्सप्रेशन ठीक

नेगेटिव्स:

▶️किरदार में गहराई नहीं

▶️इमोशनल कनेक्ट की कमी

▶️हॉरर सीन में प्रभाव नहीं

प्रभास के फैंस को शायद उनका लुक और स्टाइल पसंद आए, लेकिन एक अभिनेता के तौर पर यह उनकी यादगार फिल्मों में शामिल नहीं होगी।


सपोर्टिंग कास्ट: कोई खास प्रभाव नहीं

फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट भी औसत ही रहती है। कॉमेडी के लिए जो कलाकार रखे गए हैं, उन्हें ढंग के डायलॉग और सिचुएशन नहीं मिलती। नतीजा यह कि हंसी जबरदस्ती की लगती है।

हॉरर एलिमेंट्स में भी सपोर्टिंग कैरेक्टर्स डर पैदा करने में नाकाम रहते हैं।


म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर: शोर ज्यादा, असर कम

फिल्म का म्यूजिक औसत दर्जे का है। कोई भी गाना ऐसा नहीं जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए।

बैकग्राउंड स्कोर जरूरत से ज्यादा लाउड है, लेकिन डर पैदा करने में नाकाम रहता है। कई सीन में BGM इतना ओवरडोज हो जाता है कि सीन की गंभीरता खत्म हो जाती है।


सिनेमैटोग्राफी और VFX: ठीक-ठाक लेकिन यादगार नहीं

हवेली और सेट्स को अच्छे से फिल्माया गया है। कुछ फ्रेम्स visually appealing हैं, लेकिन VFX कई जगह कमजोर नजर आता है।

आज के दौर में दर्शक हॉरर फिल्मों में हाई-क्वालिटी VFX की उम्मीद करते हैं, लेकिन ‘The Raja Saab’ इस मोर्चे पर भी पीछे रह जाती है।


हॉरर एलिमेंट: डर नाम का नहीं

सबसे बड़ा सवाल—क्या फिल्म डराती है?
जवाब है: नहीं।

जंप स्केयर पुराने और अनुमानित हैं। डर पैदा करने के बजाय कई सीन हंसी का कारण बन जाते हैं, वो भी अनजाने में।


कॉमेडी: हंसी भी गायब

कॉमेडी ट्रैक फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी कमजोरी है।

▶️जोक्स पुराने हैं

▶️पंचलाइन कमजोर

▶️सिचुएशनल कॉमेडी का अभाव

हॉरर–कॉमेडी का मतलब होता है डर और हंसी का संतुलन, लेकिन यहां दोनों ही गायब हैं।


फिल्म की लंबाई: जरूरत से ज्यादा

करीब ढाई घंटे की यह फिल्म कम से कम 30–40 मिनट छोटी हो सकती थी। कई सीन बेवजह खींचे गए हैं, जो कहानी को आगे नहीं बढ़ाते।


दर्शकों की प्रतिक्रिया: निराशा ज्यादा

सोशल मीडिया पर दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रिया काफी मिली-जुली लेकिन ज्यादातर ने निराशा ही जताई है।

▶️“प्रभास से और बेहतर की उम्मीद थी”

▶️“न डर, न हंसी—पूरा पैसा वेस्ट”

▶️“OTT पर भी देखना मुश्किल”


बॉक्स ऑफिस पर असर

फिल्म का ओपनिंग कलेक्शन प्रभास के नाम के कारण ठीक-ठाक रह सकता है, लेकिन वर्ड ऑफ माउथ कमजोर होने की वजह से लंबी रेस में टिक पाना मुश्किल है।


क्या OTT पर बेहतर लगेगी?

संभावना है कि थिएटर में निराश करने वाली यह फिल्म OTT पर थोड़ी बेहतर लगे, लेकिन फिर भी यह कोई मस्ट-वॉच कंटेंट नहीं बन पाती।


तुलना: प्रभास की पिछली फिल्मों से

अगर ‘The Raja Saab’ की तुलना प्रभास की पिछली बड़ी फिल्मों से करें, तो यह काफी पीछे रह जाती है। न कहानी में दम है, न प्रेजेंटेशन में।


फिल्म क्यों नहीं चल पाई? (Key Reasons)

▶️कमजोर स्क्रिप्ट

▶️खराब स्क्रीनप्ले

▶️डर और हंसी दोनों की कमी

▶️लंबी और खिंची हुई फिल्म

▶️VFX और म्यूजिक का कमजोर इस्तेमाल


किसके लिए है ये फिल्म?

❌ हॉरर पसंद करने वालों के लिए नहीं
❌ कॉमेडी लवर्स के लिए नहीं
❌ फैमिली ऑडियंस के लिए भी कमजोर

✅ सिर्फ हार्डकोर प्रभास फैंस एक बार देख सकते हैं


फाइनल वर्डिक्ट: देखना है या नहीं?

‘The Raja Saab’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ अपने स्टार पावर पर टिकी हुई है। न कहानी में जान है, न डर का असर, न ही हंसी की गारंटी। ऐसे ‘राजा साब’ से प्रजा यानी दर्शकों की दूरी ही बेहतर है।

👉 आगे पढ़ें:  Sensex Today: मामूली तेजी के साथ 84,200 पर बंद, अमेरिकी टैरिफ नीति से बाजार की धड़कन तेज

Share This Article
Leave a Comment